Wednesday, July 28, 2021

कभी नहीं भरता है तृष्णा का गड्ढा

रतलाम। सायर चबूतरा स्थित गुजराती उपाश्रय में आचार्य भद्रगुप्त विजय जी के शिष्य मुनि जिनवल्लभ विजय जी ने कहा कि तृष्णा का त्याग होने पर ही धर्म में प्रवेश हो सकता है।

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